Life is a journey filled with happiness, challenges, success, and valuable lessons. Sometimes, a few meaningful lines can perfectly capture the emotions and experiences that words often struggle to express. Shayari has long been a beautiful way to reflect on life’s realities and inspire positive thinking.
In this collection, you’ll find some of the best life shayari in hindi that touch on different aspects of life, from motivation and wisdom to emotions and personal growth. Whether you’re looking for thoughtful words to share or simply seeking inspiration, these life shayari in hindi will resonate with your experiences and feelings.
हर खुशी के बदले एक नया दर्द मिलता है।
हमने चाहा था चिरागों भरा हो मंज़र,
रौशनी के बदले अंधेरा और मिलता है।
जो बीत जाए तो फिर आए ना दोबारा ये लम्हा।
तेरे हाथों में तक़दीर की नहीं चाबी कोई,
हर दम को जी ले, जैसे ये आख़िरी हो लम्हा।
किसी का साथ नहीं, बस नज़र कर रहा हूँ।
ये ज़िंदगी भी क्या अजब खेल है मेरे यार,
जो रो रहा है, वही दूसरों को ख़ुशी दे रहा हूँ।
कभी किनारा मिलता, कभी तूफ़ान था।
जिस सुकून को हमने ढूंढा सदियों से,
वो तो उस मोड़ पर था, जहाँ इंसान था।
और हर शाम दवा का वादा करती है।
हम चिरागों की तरह जलते रहे शाम-ओ-सहर,
और वो बस तुझसे मिलने का इशारा करती है।
बहुत रोके थे, बस हाथ से फिसलता गया।
ज़िंदगी में हर मंज़िल नसीबों से नहीं मिलती,
कुछ तो हमारे क़दमों का भरम था जो डगमगाया।
जिसे चाहा उसी ने हमें लूटा है।
हमने समझा था कि रोएँगे मोहब्बत में,
मगर तन्हाई ने सारा ज़हर घोल दिया है।
हमने सब्र किया तो दम ही निकल गया।
अब ये आदत बन गई है चुप रहने की,
कि हर बात पर तूफ़ान क्यूँ मचल गया।
ज़िंदगी ने सिखाया सबक, वो ख़ाली हाथ गए।
जिसने सबको हँसाया, आख़िर में रो दिया,
अपने सिवा यहाँ हर कोई साथ गए।
अगली साँस आएगी या नहीं, क्या पता?
हर घड़ी को इस उम्मीद में गँवा बैठे,
कि आने वाला कल बहुत ख़ूबसूरत होगा।
ज़िंदगी भटक रही थी, और हर कदम पर मात था।
जिसे अपना ख़ुदा समझा, वो भूत निकला,
इस कोहराम में बस एक हक़ीक़त थी: बस एक साँस का साथ था।
अब वहाँ काँटों के सिवा कुछ नहीं रहा।
ज़िंदगी ने उल्टा पाठ पढ़ाया हमें,
कि हर फूल के पीछे एक ज़हर का कुआँ रहा।
हवा का एक झोंका पर चाहिए।
ज़िंदगी भर हम यही कहते रहे,
बस एक नया सुबह का सपना चाहिए।
जितना उड़ाओ, उतना गिरता है।
हम समझते थे दर्द के बाद ही सुकून मिलेगा,
मगर यहाँ तो दर्द ही दर्द बिखरता है।
कभी ख्वाबों में तो कभी वीरानियाँ – यही ज़िंदगी है।
हमने सोचा था मिलेंगे कहीं दो रूहें एक नगर में,
पर यहाँ तो बस एक ही रूह की कहानियाँ – यही ज़िंदगी है।
जलते रहे दीपक की तरह, बस एक किनारे बैठे।
अब किसी ग़म की आदत नहीं रही दिल को,
इतनी ठंडी आग है कि पिघलना भी मुश्किल है।
जिनके पास कहने को बहुत कुछ होता है।
बाज़ार में हर चीज़ की कीमत है यारों,
बस दिल के ज़ख्मों का कोई ग्राहक नहीं होता।
खुशी की सूरत में ग़म परदा करके आया।
अब यकीन आ गया है कि दुआएँ भी धोखा हैं,
जब भी हंसी, कोई मातम सा लद कर आया।
और शाम उस जंग का मैदान-ए-ख़ाली सी।
ज़िंदगी जीते कैसे, जब हर पल ही
हथियार रखने की हिम्मत नहीं, और लड़ने की हताशा भी नहीं।
रोते हो किस बात पर, कहाँ था जो खो गया?
ज़िंदगी कोई हीरा नहीं जो चमकता हरदम,
वो एक टूटा सा दर्पण है, जहाँ हर चेहरा तोड़ा सही पर अपना तो लगता है।




