Life is full of challenges, setbacks, and moments when we need a little encouragement to keep moving forward. During such times, powerful words can inspire confidence, renew determination, and remind us that success comes to those who never give up.
This collection of motivational shayari in hindi is designed to uplift your spirit and help you stay focused on your goals. Whether you’re looking for daily inspiration or words of encouragement during difficult times, these motivational shayari in hindi will motivate you to face every challenge with courage and positivity.
तूफ़ाँ से जो घबराए, वो साहिल क्या पाएगा?
जो दरिया में उतरकर न डूबा, वो मोती क्या उखाड़ेगा?
जो दरिया में उतरकर न डूबा, वो मोती क्या उखाड़ेगा?
हर शख्स यहाँ आईना दिखाता नहीं,
हर ज़ख्म ही इंसान को जीना सिखाता नहीं।
पर एक दिन जब तू खुद से रूबरू होगा,
तब जानेगा कि दर्द भी दुआओं में शामिल होता है।
हर ज़ख्म ही इंसान को जीना सिखाता नहीं।
पर एक दिन जब तू खुद से रूबरू होगा,
तब जानेगा कि दर्द भी दुआओं में शामिल होता है।
जलती हुई लकड़ी राख से मिलती है,
हर बुझता दिया सवेरे से चलती है।
तू अकेला नहीं है अपनी रात के अंधेर में,
चाँद भी हर महीने दो दिन मरता है।
हर बुझता दिया सवेरे से चलती है।
तू अकेला नहीं है अपनी रात के अंधेर में,
चाँद भी हर महीने दो दिन मरता है।
तेरे क़दमों में कोई राह नहीं थी,
तूने ख़ुद को ही सहरा में चलना सिखा दिया।
अब हर रेत का कण तेरा नक्शा उकेरता है,
जिसने अपने अंदर का तूफ़ान थामा, उसी का नक़्शा बना दिया।
तूने ख़ुद को ही सहरा में चलना सिखा दिया।
अब हर रेत का कण तेरा नक्शा उकेरता है,
जिसने अपने अंदर का तूफ़ान थामा, उसी का नक़्शा बना दिया।
हवा ने दीये को यूँ बुझा के तो देखा,
पर जलते रहे जिनमें जुनून था उल्फ़त का।
जो तूफ़ाँ से लड़ना सीख गया एक बार,
हर रात उसी की गली में सुबह होती है।
पर जलते रहे जिनमें जुनून था उल्फ़त का।
जो तूफ़ाँ से लड़ना सीख गया एक बार,
हर रात उसी की गली में सुबह होती है।
ख़्वाब उसका नहीं टूटता जो चुप रहे,
टूटते हैं वो ख़्वाब जो काग़ज़ के घरों में रहे।
तू अपने दिल की दीवारें थोड़ी ऊँची कर ले,
फिर देख कैसे सैलाब भी सर से गुज़र जाए।
टूटते हैं वो ख़्वाब जो काग़ज़ के घरों में रहे।
तू अपने दिल की दीवारें थोड़ी ऊँची कर ले,
फिर देख कैसे सैलाब भी सर से गुज़र जाए।
ज़ख़्मों से सच्चाई ख़ुद ब ख़ुद ज़ाहिर होती है,
हर चीख़ ही इंसान को आवाज़ बनना सिखाती है।
तू चुप है क्यों अपनी बेबसी पे रोते हुए,
तेरे गिरने की आवाज़ से हिलती है ये ज़मीन।
हर चीख़ ही इंसान को आवाज़ बनना सिखाती है।
तू चुप है क्यों अपनी बेबसी पे रोते हुए,
तेरे गिरने की आवाज़ से हिलती है ये ज़मीन।
हर सुबह कोई मतलब नहीं जलती है,
जलती है वो सुबह जो किसी की रात जलाती है।
तू यूँ तो अपनी मुश्किलों का शकर न बना,
लेकिन हर ग़म को मीठा करना भी एक कला है।
जलती है वो सुबह जो किसी की रात जलाती है।
तू यूँ तो अपनी मुश्किलों का शकर न बना,
लेकिन हर ग़म को मीठा करना भी एक कला है।
वो बादल जो बरसता नहीं, फिर क्यों उमड़ता है?
वो दीपक जो धुआँ दे, वो कब तक जलता है?
तेरे भीतर का ज्वालामुखी कब फूटेगा सोच,
तू अब तक सिर्फ चिंगारी है—जलना तो बाक़ी है।
वो दीपक जो धुआँ दे, वो कब तक जलता है?
तेरे भीतर का ज्वालामुखी कब फूटेगा सोच,
तू अब तक सिर्फ चिंगारी है—जलना तो बाक़ी है।
इंसान को गिरना सिखाए क्यों आसमान?
वो ही तो है जो ऊपर उठाकर रखता है पर।
लेकिन गिरकर ही कोई दरिया में उतरता है,
गिरना कोई कमी नहीं, गिरना तो एक हुनर है।
वो ही तो है जो ऊपर उठाकर रखता है पर।
लेकिन गिरकर ही कोई दरिया में उतरता है,
गिरना कोई कमी नहीं, गिरना तो एक हुनर है।
तेरे साँसों की गिनती कम हो रही है तो क्या हुआ,
हर साँस को तू दो साँसों की तरह जी ले।
बीता हुआ कल तेरा दुश्मन नहीं, तू ही तो है जो,
आने वाले हर पल को कल का मोहताज बना ले।
हर साँस को तू दो साँसों की तरह जी ले।
बीता हुआ कल तेरा दुश्मन नहीं, तू ही तो है जो,
आने वाले हर पल को कल का मोहताज बना ले।
पेड़ जो कटता है, फिर उगता नहीं क्या?
मिट्टी के अंदर ही तो बीज का सोना है।
तू ख़ुद को मत समझ कि सब कुछ खत्म हुआ,
तेरा अंत तो शुरुआत के पीछे छुपा पड़ा है।
मिट्टी के अंदर ही तो बीज का सोना है।
तू ख़ुद को मत समझ कि सब कुछ खत्म हुआ,
तेरा अंत तो शुरुआत के पीछे छुपा पड़ा है।
हर कामयाबी के रास्ते पर काँटे बिछे मिलेंगे,
हर चाँद के चेहरे पर दाग ही सजे मिलेंगे।
तू शीशा बन अपने आँसुओं को पोंछ के देख,
हर ज़ख्म में एक नई दुनिया बसे मिलेंगे।
हर चाँद के चेहरे पर दाग ही सजे मिलेंगे।
तू शीशा बन अपने आँसुओं को पोंछ के देख,
हर ज़ख्म में एक नई दुनिया बसे मिलेंगे।
उम्र भर रेत पर महल बनाने से क्या होगा,
अगर तू पत्थर की चट्टान से डरता है।
हर लहर को रोकना सीख ले अपनी मुट्ठी में,
फिर वही लहरें तेरा ही जश्न मनाती हैं।
अगर तू पत्थर की चट्टान से डरता है।
हर लहर को रोकना सीख ले अपनी मुट्ठी में,
फिर वही लहरें तेरा ही जश्न मनाती हैं।
खो जाना भी एक खोज है, यूँ समझ ले,
बिखर जाना भी इक सजना है, यूँ समझ ले।
तू जब तक टूटेगा नहीं किसी बात पे,
तेरा बनना अधूरा है, यूँ समझ ले।
बिखर जाना भी इक सजना है, यूँ समझ ले।
तू जब तक टूटेगा नहीं किसी बात पे,
तेरा बनना अधूरा है, यूँ समझ ले।
अंधेरे में देखना सीख ले अगर दिखना है,
धूप में जलना सीख ले अगर रहना है।
हर सितारा रात की लाश पर जन्मा है,
तेरा सबेरा भी इसी रात के हिस्से में है।
धूप में जलना सीख ले अगर रहना है।
हर सितारा रात की लाश पर जन्मा है,
तेरा सबेरा भी इसी रात के हिस्से में है।
तेरे हाथ की लकीरें कोई तोड़ नहीं सकता,
बस तू ही उन्हें अपने पसीने से जोड़ सकता है।
जो पत्थर पर अपना नाम बिना चोट लिखे,
वो चोटों को अपनी पहचान से छोड़ सकता है।
बस तू ही उन्हें अपने पसीने से जोड़ सकता है।
जो पत्थर पर अपना नाम बिना चोट लिखे,
वो चोटों को अपनी पहचान से छोड़ सकता है।
तू अकेला है तो सुन—समंदर भी एक है,
और उसी की गोद में सारे जहाँ के मोती हैं।
तेरी तन्हाई तेरी तलवार है, ढाल नहीं,
जो ख़ुद से लड़ना सीख ले, वही सब से लड़ लेता है।
और उसी की गोद में सारे जहाँ के मोती हैं।
तेरी तन्हाई तेरी तलवार है, ढाल नहीं,
जो ख़ुद से लड़ना सीख ले, वही सब से लड़ लेता है।
हर मुसाफिर अपनी राह का फैसला नहीं करता,
राहें बनती हैं जब मुसाफिर चलना सीख जाता है।
तेरे क़दम थक जाएँ तो आराम कर, मगर
यह मत कहना कि मंज़िल ने तुझे बुलाना छोड़ दिया है।
राहें बनती हैं जब मुसाफिर चलना सीख जाता है।
तेरे क़दम थक जाएँ तो आराम कर, मगर
यह मत कहना कि मंज़िल ने तुझे बुलाना छोड़ दिया है।
हर तूफ़ाँ के बाद एक सन्नाटा आता है,
हर सन्नाटा किसी नए गीत की शुरुआत है।
तू रो ले भर के, फिर अपनी पीठ थपथपा,
क्योंकि दुनिया की हर शाम किसी की सुबह की सौगात है।
हर सन्नाटा किसी नए गीत की शुरुआत है।
तू रो ले भर के, फिर अपनी पीठ थपथपा,
क्योंकि दुनिया की हर शाम किसी की सुबह की सौगात है।




